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भूत-प्रेत का डर दिखाकर छात्रा से ठगी करने वाला ढोंगी तांत्रिक दोषी, कोर्ट ने सुनाई 3 साल की सजा

बलौदाबाजार-भाटापारा। अंधविश्वास का भय दिखाकर एक कॉलेज छात्रा से ऑनलाइन ठगी करने वाले मध्य प्रदेश के एक ढोंगी तांत्रिक को न्यायालय ने तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। थाना सिमगा पुलिस की मजबूत विवेचना और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध हुए, जिसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सिमगा की अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए जेल भेजने का आदेश दिया।पुलिस के अनुसार, सिमगा निवासी बीएससी तृतीय सेमेस्टर की छात्रा को आरोपी जयप्रकाश मिश्रा ने मोबाइल पर कॉल कर यह कहकर डराया कि उस पर भूत-प्रेत का साया है। आरोपी ने पूजा-पाठ कराने के नाम पर छात्रा को झांसे में लिया और अपने क्यूआर कोड के माध्यम से अलग-अलग किश्तों में कुल 18,600 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए। ठगी का एहसास होने पर पीडि़ता ने थाना सिमगा में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर अपराध क्रमांक 490/2025 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।मामले की विवेचना प्रधान आरक्षक ओंकार सिंह राजपूत ने की। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण, गवाहों के बयान, बैंक खाते का विवरण और अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाए। बैंक ऑफ बड़ौदा से प्राप्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान सुनिश्चित की गई। इसके बाद मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से आरोपी जयप्रकाश मिश्रा को गिरफ्तार कर न्यायालय में मजबूत चार्जशीट प्रस्तुत की गई।सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी का अपराध संदेह से परे साबित किया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सिमगा की अदालत ने 9 जुलाई 2026 को फैसला सुनाते हुए आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत दो वर्ष के कारावास एवं 300 रुपये के अर्थदंड तथा धारा 319(2) के तहत एक वर्ष के कारावास एवं 200 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।सजा पाए आरोपी की पहचान जयप्रकाश मिश्रा (44 वर्ष), पिता श्यामलाल मिश्रा, निवासी रामानुज कॉलोनी, वार्ड नंबर-17, थाना सोहागपुर, जिला शहडोल (मध्य प्रदेश) के रूप में हुई है। इस प्रकरण में सहायक लोक अभियोजन अधिकारी मनीष कुमार केशर तथा विवेचना अधिकारी प्रधान आरक्षक ओंकार सिंह राजपूत की भूमिका को न्यायालय में आरोपी को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण माना गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने दोनों के कार्य की सराहना की है।

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