हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है हर महीने की कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या कहलाती है जिसमें पितरों की शांति स्नान दान तर्पण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है इस दिन पितृ तर्पण के साथ शनिदेव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है
हिंदू पंचांग में हर महीने को दो भागों में बांटा गया है पहले कृष्ण पक्ष दूसरा शुक्ल पक्ष शुक्ल पक्ष जब चंद्रमा बढ़ता है और दूसरा कृष्ण पक्ष जब चंद्रमा घटता है कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि जब चंद्रमा दिखाई नहीं देता अमावस्या कहलाती है आषाढ़ महीने में आने वाली इस अमावस्या को ही आषाढ़ अमावस्या कहते हैं
अमावस्या स्नान और तर्पण
सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें अगर संभव न हो तो घर के नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें
पितरों की पूजा तांबे की लोट मैं जल थोड़ा काला तिल लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ दे और पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें
पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि प्राचीन काल में काशीपुरी में माटी नाम के एक महान और सदाचारी ब्राह्मण रहते थे वे भगवान शिव के अनन्य भक्त थे और हमेशा शिवजी के मंत्र का जाप करते थे माटी ब्राह्मण की कोई संतान नहीं थी जिसके कारण वह बहुत दुखी रहते थे पुत्र प्राप्ति की कामना के लिए उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या की उनकी सच्ची भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव में उन्हें आशीर्वाद दिया कि उन्हें एक अत्यंत बुद्धिमान पराक्रमी और तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति होगी शिव जी के वरदान से वह ब्राह्मण अत्यंत प्रसन्न हुआ तभी से हर मास की अमावस्या तिथि पर शिव कृपा पाप मुक्ति और पितरों की शांति के लिए उपवास दान और पूजन की परंपरा शुरू हुईकालसर्प दोष से मुक्ति आषाढ़ अमावस्या पितृ पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण तिथि में से एक है जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष कालसर्प दोष या शनि से जुड़ी समस्या चल रही है उनके लिए यह दिन बहुत शुभ माना जाता है इस दिन श्रद्धा और विधि विधान से पूजन दान पुण्य करने तथा गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने से सभी प्रकार के दोसो से मुक्ति मिलती है
पीपल को करें जल अर्पित
इस दिन श्रद्धा पूर्वक पीपल के पेड़ को जल अर्पित करें दीपक जलाएं और पेड़ के नीचे पितरों के नाम से घड़ा बांधकर पितरों का नाम लेकर तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख समृद्धि का मार्ग खुलता है पितरों के नाम से ब्राह्मण को भौजन करावे और वस्त्र अन्य का दान अपनी समर्थ के अनुसार करने से किसी भी प्रकार के दोष से मुक्ति मिलती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में आने वाली सभी बधाये दूर होने लगती है

