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CG School Fee increased : सरकारी स्कूलों की बढ़ी फीस, महंगाई के बीच अभिभावकों पर नया बोझ

CG School Fee increased : रायपुर। बढ़ती महंगाई के बीच अब शिक्षा भी महंगी होती नजर आ रही है। छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए सरकारी स्कूलों में स्थानीय शुल्क (लोकल फीस) बढ़ाने का आदेश जारी कर दिया है। इस फैसले के बाद लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ने वाला है।

किन स्कूलों पर लागू होगा फैसला?

शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार यह बढ़ी हुई फीस—

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  • सभी सरकारी स्कूलों
  • स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल
  • अनुदान प्राप्त (Grant-in-Aid) विद्यालयों

पर लागू होगी। यानी राज्यभर के बड़ी संख्या में छात्रों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

क्या है लोकल फीस?

लोकल फीस के अंतर्गत स्कूलों में विकास, रखरखाव, स्वच्छता, खेलकूद और अन्य स्थानीय गतिविधियों के लिए शुल्क लिया जाता है। अब इस शुल्क में बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे कुल फीस पहले से ज्यादा हो जाएगी।

क्यों बढ़ाई गई फीस?

सूत्रों के मुताबिक, स्कूलों के संचालन, रखरखाव और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। विभाग का मानना है कि बढ़ी हुई फीस से स्कूलों में बुनियादी ढांचे में सुधार और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

अभिभावकों में नाराजगी

फीस बढ़ोतरी के फैसले के बाद अभिभावकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे परिवारों के लिए यह अतिरिक्त बोझ है। कई अभिभावकों ने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

शिक्षा विशेषज्ञों की राय

शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी स्कूलों की फीस बढ़ाना एक संवेदनशील मुद्दा है। जहां एक ओर स्कूलों को बेहतर संसाधनों की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

छात्रों पर क्या होगा असर?

फीस बढ़ने से कई गरीब परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। कुछ मामलों में छात्र स्कूल बदलने या पढ़ाई छोड़ने तक की स्थिति में आ सकते हैं, जिससे ड्रॉपआउट दर बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

सरकार के सामने चुनौती

सरकार के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह शिक्षा की गुणवत्ता और सुलभता के बीच संतुलन बनाए। यदि फीस बढ़ोतरी को लेकर विरोध बढ़ता है, तो सरकार को इस पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

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