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Apara Ekadashi 2026 : भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना व्यर्थ हो सकता है व्रत का पुण्य

Apara Ekadashi 2026 : नई दिल्ली।’ हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष यह पावन व्रत 13 मई, 2026 को रखा जाएगा। धार्मिक ग्रंथों में अपरा एकादशी को ‘अपार’ पुण्य देने वाली तिथि बताया गया है, लेकिन ज्योतिषियों और धर्मगुरुओं का कहना है कि इसके नियम अत्यंत कड़े हैं। थोड़ी सी भी लापरवाही साधक के संचित पुण्यों को नष्ट कर सकती है।

क्यों खास है अपरा एकादशी?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है और ब्रह्महत्या जैसे घोर पापों का प्रभाव भी कम हो जाता है। भगवान विष्णु की भक्ति का यह दिन सुख-समृद्धि और आरोग्य प्रदान करने वाला माना गया है।

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सावधान! इन नियमों की अनदेखी पड़ेगी भारी

शास्त्रों में अपरा एकादशी के लिए कुछ विशेष निषेध बताए गए हैं, जिनका पालन करना हर व्रत रखने वाले और न रखने वाले के लिए भी जरूरी है:

  • चावल का त्याग अनिवार्य: एकादशी के दिन चावल खाना सबसे बड़ा दोष माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन चावल खाना ‘रेंगने वाले जीव’ की योनि में जन्म लेने के समान है। इसलिए, घर में किसी भी सदस्य को इस दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।

  • ब्रह्मचर्य और संयम: व्रत की अवधि के दौरान मन, वचन और कर्म से शुद्धता बनाए रखना आवश्यक है। किसी की निंदा करना या झूठ बोलना व्रत को निष्फल कर देता है।

  • तामसिक भोजन वर्जित: इस दिन लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन पूरी तरह वर्जित है। सात्विक रहकर ही भगवान श्रीहरि का ध्यान करना चाहिए।

  • तुलसी दल का नियम: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पूर्व (दशमी) को ही तोड़कर रख लेने चाहिए।

व्रत का शुभ मुहूर्त और विधि

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, एकादशी तिथि का प्रारंभ और समापन काल अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

कार्यक्रम विवरण
व्रत तिथि 13 मई 2026
पूजा का समय सूर्योदय से लेकर शुभ चौघड़िया तक
प्रमुख देव भगवान श्रीहरि विष्णु (त्रिविक्रम रूप)
पारण का समय 14 मई को द्वादशी तिथि के भीतर

विशेष सलाह

धर्मगुरुओं का मानना है कि यदि आप स्वास्थ्य कारणों से पूर्ण उपवास नहीं रख सकते, तो एक समय फलाहार लेकर व्रत किया जा सकता है, परंतु नियमों में अनुशासन बनाए रखना अनिवार्य है। “अपरा” का अर्थ ही है “अपार”, यानी जो अपार फल दे, बशर्ते आपकी भक्ति और नियम में कोई खोट न हो।

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